Home » brain dead » ज़िंदगी में अंगदान ही सबसे बड़ा दान कहा जाता है जाने पूरी खबर!
health related Latest Ayurveda News in Hindi - आयुर्वेद ब्रेकिंग न्यूज़ Uncategorized अजब-गज़ब आई हेल्थ आहार योजना जवान रहो डाइट और फिटनेस - Diet & Fitness डायबिटीज लाइफस्टाइल स्वास्थ्य हेयर और ब्यूटी हेल्थ इंडस्ट्रीज न्यूज

ज़िंदगी में अंगदान ही सबसे बड़ा दान कहा जाता है जाने पूरी खबर!

कौन कहता है कि इंसान अमर नहीं हो सकता. जरूर हो सकता है. इसके लिए अमृत पीने की जरूरत नहीं है. बस अंगदान जैसा पूण्य कार्य करना पड़ेगा. दरअसल, डीएनए के रूप में उसका अस्तित्व उसके गुजर जाने के बाद भी मौजूद होगा. उस अंग में मौजूद डीएनए एक जेनरेशन से दूसरे जेनरेशन में चलता जाएगा. अगर किसी के अंग चार-पांच लोगों को ट्रांसप्लांट हो गए तो अमरता की संभावना और भी प्रबल हो जाएगी. अपने देश में अंगदान के इंतजार में कई बेटे, कई पिता, कई मांएं, कई बहनें, कई भाई और कई दोस्त जिंदगी की जंग हार जाते हैं. अगर हॉस्पिटल में ब्रेन डेड हो चुके लोगों के अंग ही दान कर दिया जाएं तो देश की जरूरत लगभग पूरी हो सकती है. ऑर्गन डोनेशन पर एक्सपर्ट्स से बात कर जानकारी दे रहे हैं.

जब कोई शख्स इस धरती पर नहीं रहता तो वह यादों और अच्छी बातों के जरिए लोगों के बीच जिंदा रहता है, लेकिन ऑर्गन डोनेशन यानी अंगदान की बदौलत तो वह लोगों के अंगों के अंदर जिंदा रहता है. और यह बात अंगदान को बहुत बड़ा बना देती है. दिल, आंखें, लंग्स, किडनी, पेनक्रियाज, लिवर और स्किन जैसे अंग किसी की मौत के बाद किसी और के काम आ जाते हैं और उसे नई जिंदगी दे जाते हैं.

बहन ने किया लिवर डोनेट

हेपटाइटिस की वजह से उसके छोटे भाई की लिवर खराब हो गई थी. डॉक्टरों का कहना था कि उसका 90 फीसदी लिवर खराब हो चुका है. घर में सभी लोगों ने रोना शुरू कर दिया, लेकिन उसकी बहन ने बचे हुए 10 फीसदी लिवर पर फोकस किया और एयर ऐंबुलेंस से मध्य प्रदेश के एक शहर से दिल्ली के बड़े अस्पताल लेकर आई. उसने भाई को अपना लिवर डोनेट किया और भाई की जान बचाई. इस ऑपरेशन में डॉक्टरों को 14 घंटे लगे. ऑपरेशन सफल रहा और दोनों स्वस्थ हैं. इस पूरी कवायद में बहन के ससुराल वालों ने उसका पूरा साथ दिया.

डोनेशन की जरूरत क्यों?

इंसान के शरीर में जो अंग काम करते हैं, वैसे अंग बनाना अभी संभव नहीं हुआ है. इस फील्ड में रिसर्च जोरों पर है. फिर भी वैज्ञानिकों का मानना है कि शरीर से काफी हद तक मिलते-जुलते कुछ अंग बनाने में 5 से 10 बरस तक लग सकते हैं. ऐसे में अगर कोई अंग काम नहीं कर रहा हो तो ट्रांसप्लांट का ही ऑप्शन बचता है और इसीलिए अंगदान की जरूरत है. लेकिन दिक्कत यह है कि भारत में अब भी लोग अंगदान से झिझकते हैं और इसीलिए ट्रांसप्लांट के लिए अंग मिल नहीं पाते.

क्या है ऑर्गन डोनेशन

मानव शरीर के कई ऐसे अंग हैं जिन्हें काम न करने पर बदला जा सकता है. इसके लिए किसी दूसरे हेल्दी इंसान से अंग लेकर उसे बीमार व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया जाता है. प्रत्यारोपण के लिए अंगों का मिलना तभी संभव है जब कोई अंग देने के लिए तैयार हो. किसी दूसरे को अंग देना ही आर्गन डोनेशन है. आंखों को छोड़कर बाकी अंगों के मामले में यह तभी मुमकिन है जब शख्स के दिल की धड़कनें चलती रहें, भले ही उसके ब्रेन ने काम करना बंद कर दिया हो.

ब्रेन डेड और सामान्य मौत में अंतरः-

क्या है ब्रेन डेड

जब शरीर के बाकी अंग काम कर रहे हों, लेकिन किसी वजह से ब्रेन ने काम करना बंद कर दिया हो और फिर से उसके काम करने की संभावना न हो तो इंसान को ब्रेन डेड माना जाता है. ब्रेन के इस स्थिति में पहुंचने की खास वजहें होती हैं:

-सिर में गंभीर चोट लगने से

-ट्यूमर की वजह से

-लकवे की वजह से.

कोमा और ब्रेन डेथ में अंतर

इन दोनों में एक बड़ा अंतर यह है कि कोमा से इंसान नॉर्मल स्थिति में वापस आ सकता है, लेकिन ब्रेन डेथ होने के बाद ऐसा नहीं होता. कोमा की स्थिति में शख्स का ब्रेन डेड नहीं होता, उसके दिमाग का कुछ हिस्सा काम कर रहा होता है जबकि ब्रेन डेड के मामले में ऐसा नहीं होता. कोमा की स्थिति में यह जरूरी नहीं है कि इंसान वेंटिलेटर पर ही हो जबकि ब्रेन डेथ की स्थिति में वह इसी पर रहता है. तो डोनेशन ब्रेन डेड के मामले में ही हो सकता है, कोमा वाले पेशंट का नहीं.

About the author

TheHealthCareToday

Add Comment

Click here to post a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

विशेष रुप से प्रदर्शित

Powered by themekiller.com