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हरा साग खाने से हो सकता है शरीर में ये नुकसान!

जिन रोगियों में खून के असामान्य थक्कों या धब्बे जेसे  बनने और खून जमने की समस्या होती है, उन्हें एक बहुत जरूरी दवा ओलेनी चाहिए और इस कारण कई बार हरा साग खाने से मना किया जाता है. यह दवा वार्फरिन है यह और इसके जैसी अनेक दवाएं, जिन्हें कुमारिन-परिवार की दवाएं कहते हैं, इनमे विटमिन-K का प्रतिरोध करती हैं.

विटमिन-K न हो तो न जाने कितने ही लोगों की रक्तस्राव से मौत हो जाए, लेकिन फिर अनेक रोगियों में खून का जमना हानिकारक हो जाता है. मान लीजिए किसी रोगी में हृदयवॉल्व की सर्जरी हुई है या उसे कोई ऐसा रोग है, जिसमें खून बार-बार और जल्दी-जल्दी जमा करता है. 
ऐसे में अगर विटमिन-K का प्रतिरोध न किया गया, तो फिर खून का लगातार जमना हानिकारक या कभी-कभी जानलेवा साबित होगा. इसलिए ऐसे रोगियों में खून को पतला करने वाली दवाएं चलाई जाती हैं. इन्हीं दवाओं में कुमारिन-परिवार की सदस्य दवाएं भी शामिल हैं, जिनमें वार्फरिन प्रमुख है.

हरा साग विटमिन-K का प्रमुख स्रोत है. इसे खाने से शरीर को विटमिन-K की प्राप्ति होती है. लेकिन फिर जिन रोगियों को विटमिन-K नहीं चाहिए या जिनके लिए विटामिन-के की प्रचुरता हानिकारक है और हरे साग का सेवन वार्फरिन को समुचित कार्य करने से रोकेगा.


आयरन की गोलियां खाएं इसलिए जायदा से जयादा डॉक्टर की सलाह होती है कि अगर आप वार्फरिन या अन्य कुमारिन-दवाएं खाते हैं, तो हरा साग कम-से कम खाएं या न खाएं. हां, यह जरूर है कि ऐसा करने से आपको आवश्यक आयरन नहीं मिलेगा और अनीमिया की आशंका बढ़ जाएगी, लेकिन ऐसी परिस्थिति में वार्फरिन के साथ हरे साग की बजाय आयरन की गोलियों का सेवन कहीं बेहतर है.

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