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महिलाओं में क्यों होता है सर्वाईकल डिजेनेरेटिव डिस्क का खतरा ? जानें लक्षण और इलाज…

सर्वाइकल डिजेनेरेटिव डिस्क का खतरा महिलाओं को इसलिए होता है क्योंकि उनमें कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसके अलावा पीरियड्स, प्रेगनेंसी और काम की जिम्मेदारियों के बीच खुद का ध्यान न रखने के कारण महिलाओं का शरीर अपेक्षाकृत कमजोर हो जाता है। ऐसे में इन हड्डियों की जोड़ों में जब दवाब पड़ता है तो बहुत अधिक तकलीफ होती है। सर्वाइकल डिजेनेरेटिव डिस्क एक तरह की बीमारी है जिसमें गर्दन एवं कंधों में दर्द तथा जकड़न के साथ-साथ सिर में पीड़ा तथा तनाव बना रहता है।

क्या हैं सर्वाइकल डिजेनरेटिव डिस्क के लक्षण

गर्दन में खिंचाव

गर्दन में जलन और झुनझुनी का एहसास

गर्दन और सिर को हिलाने पर काफी दर्द होता है

गर्दन में कड़ापन महसूस होना।

गर्दन का दर्द कभी-कभी कंधों में भी महसूस होता है।

गर्दन में जकड़न आ जाती है जिससे सिर हिलाने में दर्द होता है।

बीमारी के घातक होने पर चक्कर और उल्टियां भी होती हैं।

ऐसे करें इसका इलाज
इस दर्द को ठीक करने के लिए कैस्टर ऑयल थेरैपी या हॉट एंड कोल्ड थेरैपी लें। इन थैरेपीज से गर्दन की मांसपेशियों व अन्य ऊतकों को लचीला बनाया जाता है जिससे असामान्य ऊतकों का एलाइनमेंट किया जाता है। ज्यादातर रोगियों को एक या दो उपचारों के बाद डिस्क के नर्व पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है। जिससे में पहले की तरह लचीलाप आ जाता है। हालांकि ये इलाज किसी विशेषज्ञ के देखरेख में करें। साथ ही एक्यूप्रेशर और फिजियोथेरपी भी इसमें काम आती है। स्वास्थ से जुड़ी सभी जानकारी के लिए हमसे संपर्क करेंहमसे जुड़ने के लिए यहां click करें

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