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जानें स्ट्रोक के मामले में कितना बेशकीमती है “समय”..

स्ट्रोक अपने आप मे  बीमारी नही है. प्रायः, ये कई अन्य बीमारियों का दुष्परिणाम है, जैसे- हाइपरटेंशन, मधुमेह, खून की नलिकाओं मे रक्त का थक्का बनना आदि। जब हमारे मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून ठीक से नहीं पहुंचता,चाहे उसका कारण कुछ भी हो, तो उस हिस्से के सूक्ष्म कोशिकाएं मृत हो जाती हैं। इन कोशिकाओं के काम बंद करने से शरीर का एक हिस्सा लकवे का शिकार हो जाता है। स्ट्रोक से दिमाग़ को होने वाले नुकसान की भरपाई यानी मृत ब्रेन सेल्स को दोबारा जीवित करना तो असंभव है। हालांकि, यदि इसका समय रहते इलाज़ किया जाए तो नर्व सेल्स के मृत होने की प्रक्रिया पर काफ़ी हद तक काबू ज़रूर पाया जा सकता है।

स्ट्रोक के मामले में समय बेशकीमती होता है

ध्यान रहे,स्ट्रोक का एक बहुत बड़ा कारण तनाव यानी स्ट्रेस ही है। आवाज मे लड़खड़ाहट, एक तरफ़ मुंह टेढ़ा हो जाना, हाथ या पैरों में आकस्मिक कमज़ोरी आदि स्ट्रोक पड़ने के लक्षण हैं। लकवे के इलाज के बारे में कम जानकारी के कारण लोग बहुत तरह के असामान्य या अवैज्ञानिक तरीक़ो से इलाज करने लगते हैं। यह ठीक नहीं है क्योंकि स्ट्रोक के मामले में समय बेशकीमती होता है। स्ट्रोक के कारण अगर लकवा हो जाए तो फिज़ियोथैरपी बहुत कारगर होती है। अगर लकवा ग्रस्त रोगी को समय से अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो फिज़ियोथैरपी उसके लिए वरदान हो सकती है। सही फिज़ियोथैरपी एक न्यूरो-फिज़ियोथेरपिस्ट की देख-रेख में ही हो सकती है।अधिक जानकारी या स्वास्थ संबधित किसी भी सलाह के लिए हमसे संपर्क करेंहमसे जुड़ने के लिए यहां click करें

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