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च्युइंग चबाने से है खतरा बिमारी का जानकर हो जायेंगे!

बबल गम तो आपको याद होगा आजकल कई फ्लेवर के च्युइंग गम बाजार मिलती रहती हैं. कई लोगों को च्युइंग चबाना अच्छा लगता है.

कुछ लोग च्युइंग गम मुंह की एक्सरसाइज के लिए चबाते हैं तो कुछ लोग यूं ही फैशन में या टाइम पास के तौर पर इसका इस्तेमाल करते हैं. अगर आप भी इन्ही लोगों में से एक हैं तो सावधान हो जाएं क्योंकि इसे खाने से बहुत जायदा बुरे संकेत हैं.

अगर आप भी बहुत ज्यादा च्युइंग गम चबाते हैं या फिर खाने में वाइट कलर का मेयोनीज आपको काफी पसंद है तो इन चीजों का बहुत ज्यादा सेवन करने से पहले सावधान हो जाइए. इन चीजों में मौजूद फूड एडिटिव की वजह से आपको कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. हाल ही में हुई एक स्टडी के मुताबिक च्युइंग गम या मेयोनीज जैसी चीजों में वाइटनिंग एजेंट के रूप में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले फूड एडिटिव की वजह से पेट में जलन से जुड़ी बीमारी और कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा रहता है.

खतरा

दरअसल, खाद्य पदार्थों में रूप, रंग, गंध या अन्य किसी गुण को सुरक्षित रखने या बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाले एजेंट्स को फूड एडिटिव कहा जाता है. च्युइंग गम या मेयोनीज जैसी चीजों में वाइटनिंग एजेंट के रूप में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले फूड एडिटिव की वजह से पेट में जलन से जुड़ी बीमारी और कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा रहता है. हाल ही में हुई एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है.

 

आंतों पर पड़ता है बुरा असर

फ्रंटियर्स इन न्यूट्रिशन नाम के जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी में कहा गया है कि ऐसे फूड आइटम्स का सेवन करना जिसमें E171 फूड एडिटिव शामिल है का सीधा असर हमारे गट यानी आंतों पर पड़ता है जिसकी वजह से पेट से जुड़ी कई बीमारियां और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने की आशंका भी रहती है. बावजूद इसके अब तक फूड एडिटिव्स का हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है इस बारे में बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है.

कैंसर के इलाज के बाद अक्सर जरूरत से ज्यादा थकान महसूस होने लगती है. ऐसे में सामान्य आराम और इसे सहजता से लेने से थकावट को दूर किया जा सकता है. थकान को दूर करने के लिये कैंसर पीड़ितों को योग और मेडिटेशन के साथ नियमित व्यायाम करना चाहिए. इसके साथ ही म्यूजिक थेरपी के माध्यम से भी उन्हें बेहतर महसूस हो सकता है और वे ऊर्जावान महसूस करते हैं.

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