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कान में छेद होने से नही होगी ये बिमारी जानकर होंगे हेरान!

भारत की बहुत सी परंपराओं में एक परंपरा जो आजकल का फैशन बन गई है वो है कान छिदवाना. कर्ण भेदन की इस क्रिया का हमारी सभ्यता में बहुत महत्व है. बहुत से क्षेत्र की परंपराओं में तो पुरुषों को भी कान छिदवाना अनिवार्य है. लेकिन क्या आप जानते है इस परंपरा का जितना महत्व फैशन के नजरिेए से है उससे कहीं ज्यादा सेहत के लिहाज से है. आइए जानते है स्वास्थ के नजरिए से इसके कौन से लाभ है.

दिमाग के विकास में महत्व

कान को भेदने की इस प्रक्रिया को करने से बच्चों के दिमागी विकास में योगदान होता है. क्योंकि कान के निचले हिस्से यानि पालि में मेरिडियन केंद्र होता है जो दिमाग के बांए हिस्से को दाएं हिस्से से जोड़ता है. एक्यूप्रेशर की थेरेपी के अनुसार जब इस हिस्से पर दबाव डाला जाता है तो दिमाग के विकास में तेजी आती है.

आंखों की रोशनी को बढाने में करता है मदद

कान को छिदवाने के बहुत सारे फायदे हैं, इसकी मदद से आंखों की रोशनी को बढाने में मदद मिलती है साथ ही शरीर में ऊर्जा का संचार भी तेजी के साथ होता है.

सुनने की शक्ति में वृद्धि

एक्युप्रेशर थेरेपी कहती है कि कान के जिस भाग पर छेदन किया जाता है उस भाग में मास्टर सेंसोरियल और मास्टर सेलेब्रल केंद्र होते हैं. इन केंद्रों की मदद से बच्चों में सुनने की क्षमता का विकास होता है. एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों के कान में होने वाली सरसराहट या सीटी बजने जैसी समस्या से राहत मिलती है.

तनाव और अवसाद से राहत

कान छिदवाने की प्रक्रिया को करने से तनाव और अवसाद की समस्या से राहत मिलती है. हिस्टीरिया की समस्या में ये प्रक्रिया लाभदायक है क्योंकि  कान छेदने वाली जगह पर सेलेब्रल ग्रंथि का केंद्र होता है. एक्यूप्रेशर सिद्धांत बताते हैं कि इस जगह पर दबाव पड़ने से दिमाग की किसी भी अस्वस्थता को दूर करने में मदद करता है जैसे ओसीडी, तनाव, अवसाद, चिंता.

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