Home » Bollywood News » अब हर घर में सुनेगी अपने बच्चे की किलकारी ऐसे होगा टेस्ट ट्यूब बेबी!
health related अजब-गज़ब आहार योजना गर्भावस्था और परवरिश जवान रहो लाइफस्टाइल सेक्‍स और संबंध हेल्थ इंडस्ट्रीज न्यूज

अब हर घर में सुनेगी अपने बच्चे की किलकारी ऐसे होगा टेस्ट ट्यूब बेबी!

21वि सदी चल रही है और आज के समय में टेक्नोलॉजी ने सबकुछ पॉसिबल कर दिया है आज के समय में माँ भी हर कोई बन सकता है घर में बच्चे की आवाज़ सुन्नी अब आसान हो गया है वरना पहले अपने बच्चो के तरस जाते थे ऐसे ही आजकल लोग टेस्ट ट्यूब प्रक्रिया के जरिए बच्चे पैदा कर रहे हैं, लेकिन बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि आखिर कैसे टेस्ट ट्यूब बेबी को पैदा किया जाता है और इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली IVF तकनीक क्या होती है. तो यहां हम आपको बता रहे हैं कि IVF तकनीक की मदद से कैसे महिला के गर्भाशय के बाहर लैब में बच्चे का जन्म होता है.

इस प्रक्रिया में महिला के अंडाशय से अंडों को अलग कर शरीर के बाहर लैब में पुरुष के शुक्राणुओं के साथ निषेचित किया जाता है और इसके बाद तैयार भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है. इस IVF तकनीकी की मदद से निषेचन की प्रक्रिया उन महिलाओं पर की जाती है, जिनके पतियों में शुक्राणुओं की मात्रा काफी कम होती है.

आमतौर पर महिला के अंडाशय में एक महीने में एक ही अंडा बनता है, लेकिन IVF तकनीक की मदद से महिला को ऐसी दवाइयां दी जाती हैं कि उसके अंडाशय में एक से ज्यादा अंडे बनने लगते हैं. ज्यादा अंडे इसलिए बनाये जाते हैं ताकि भ्रूण बनाया जा सके.

इसके बाद महिला को 15 मिनट के लिए बेहोश किया जाता है और उसके बाद अल्ट्रासाउंड इमेज ये जरिए महिला की योनि से होकर एक पतली सिरिंज उसके अंडाशय तक डाली जाती है और वहां मौजूद अंडों को बाहर निकाला जाता है.

इसके बाद लैब में पुरुष के वीर्य के पुष्ट शुक्राणु अलग किये जाते हैं और इनका निषेचन महिला के अंडों के साथ कराया जाता है. इसके लिए एक अंडे को पकड़कर उसमें एक स्वस्थ शुक्राणू के इंजेक्ट किया जाता है और इसके बाद इसे फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया के लिए इंक्यूवेटर में रखा जाता है.

इंक्यूवेटर में रखे भ्रूण पर वैज्ञानिक पूरी तरह से नजर रखते हैं. 2 से 3 दिन बाद य निषेचित अंडा 6 से 8 सेल के भ्रूण में बदल जाता है. अब इन विकसित भ्रूणों में से अच्छी क्वालिटी के 2 या 3 भ्रूणों को प्रत्यारोपरण के लिए चुना जाता है.

अब विकसित भ्रूण में से 1 या अधिक स्वस्थ भ्रूणों का चयन किया जाता है. डॉक्टर इस भ्रूण को महिला के गर्भाशय में एक पतली नली के जरिये पहुंचा देते हैं और फिर भ्रूण ठीक उसी तरह से महिला के गर्भ में विकसित होता है जैसे प्राकृतिक भ्रूण होता है.

About the author

TheHealthCareToday

Add Comment

Click here to post a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

विशेष रुप से प्रदर्शित

Powered by themekiller.com