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अगर करे रहे है बच्चो की प्लानिंग तो ध्यान दे इन बातो पर!

आजकल शादी के बाद से ही बच्चो की प्लानिंग शुरू हो जाती है कोन नही चाहता अपना परिवार आगे बढ़ाना और  अगर आप फैमिली प्लानिंग कर रही हैं तो आपके लिए अपने वजन पर नजर बनाए रखना बहुत जरूरी है. महिलाओं के गर्भधारण को प्रभावित करने वाले कई कारणों में वजन भी एक अहम वजह है. स्वास्थ्य, उम्र, बॉडी मास इंडेक्स और वजन के सही तालमेल से ही गर्भधारण सफल होता है.

वजन की बात करते ही लोगों के दिमाग में सिर्फ मोटापे का ख्याल आता है. मोटापा तो कई समस्याओं कारण है लेकिन यह जरूरी नहीं हैं कि सिर्फ अधिक वजन से ही गर्भधारण प्रभावित हो, बल्कि कम वजन से भी गर्भधारण में कई प्रकार की समस्याएं आ सकती हैं.”

कम वजन की महिलाओं में प्रीटर्म बर्थ का खतरा भी होता है. प्रीटर्म न भी हो, तो भी बच्चे का वजन सामान्य से कम होता है जिससे बच्चे को भी कई परेशानियां हो सकती है. एनिमिया या कुछ अन्य प्रकार की समस्याएं भी हो सकती हैं. इसलिए अगर महिलाएं गर्भधारण करने की इच्छुक हैं तो प्रयास करें कि वजन सामान्य रखें.”

ओव्यूलेशन :

मोटापे से ओव्यूलेशन प्रभावित होता है. वजन बढ़ने से हार्मोन प्रभावित होते हैं, इससे ओव्यूलेशन प्रभावित होता है और गर्भधारण की संभावना कम हो जाती हैं

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम :

यह वह अवस्था है जब महिलाओं में इंसुलिन का स्तर बढ़ता है. इसके कारण ओव्यूलेशन का घटना अनियमित मासिक और टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन में वृद्धि होती है. पीड़ित महिला को कुछ किलो वजन घटा कर गर्भधारण का प्रयास करना चाहिए. इससे बिना कोई दवा खाये ही समस्या को दूर किया जा सकता है.

गर्भपात का खतरा :

वजन बढ़ने के कारण गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है. अत्यधिक वजन के कारण कई बार आईवीएफ ट्रीटमेंट में भी परेशानी आती है

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