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दिल्ली वालों को ‘डेंगू के डंक’ से बचाएगी ये मछली

New Delhi: . एक खराब मछली पूरे तालाब को गंदा कर सकती है,  ये कहावत तो आपने कई बार सुनी ही होगी लेकिन आज हम आपको ठीक इसके उलट एक ऐसी मछली के बारे में बता रहे हैं जो लोगों को डेंगू के डंक से बचा सकती है. इस मछली का नाम है गम्बूजिया. ये मछली आपको सिर्फ डेंगू ही नहीं बल्कि मलेरिया की चपेट में आने से भी बचा सकती है.

दरअसल नॉर्थ MCD का स्वास्थ्य विभाग डेंगू-मलेरिया के मच्छरों से लड़ने के लिए ईको-फ्रेंडली तरीके ढूंढ़ रहा है. स्वास्थ्य विभाग इस मछली के द्वारा दिल्ली को डेंगू-मलेरिया फैलाने वाले जानलेवा मच्छरों के लार्वा से बचाने की कोशिश कर रहा है. गम्बूजिया पानी में छोड़े गए मच्छर के लार्वा को खा जाती है.

लिहाज़ा गम्बूजिया मछली को बढ़ावा देकर नॉर्थ एमसीडी मच्छरों पर काबू पाने की कोशिश में है. मलेरिया और डेंगू के प्रकोप से निपटने के लिए गम्बूजिया मछली को हथियार बनाने की तैयारी स्वास्थ्य विभाग शुरू कर चुका है. तालाबों में गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही पनपने वाले मच्छरों पर रोक लगाने के लिए मछली गम्बूजिया मछली छोड़ने की योजना तैयार की है. डेंगू और मलेरिया के लार्वा मिलते ही ये मछलियां तेजी से उन्हें खाना शुरू कर देती हैं, क्योंकि जितने तेज गति से इन बीमारियों का लार्वा बढ़ता है, उतने ही तेजी से ये मछलियां भी.

North MCD के उप स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रमोद वर्मा के मुताबिक,  डेंगू फैलाने वाले मादा ऐडीज मच्छर और मलेरिया फैलाने वाले मादा एनाफलीज मच्छरों को फैलने से रोकने के लिए तालाबों के पानी में गम्बूजिया मछली छोड़ी जाएंगी. पानी पर अंडे देने वाले मच्छरों के लार्वा को ही मच्छर पैदा होने से पहले ही यह मछली चट कर जाएगी और  मच्छरों की बढ़ती तादाद पर कुछ हद तक रोक लगेगी. आपको बता दें एक गम्बूसिया मछली 24 घंटे में 100 से 300 लार्वा खा सकती है.  गम्बूसिया मछली को ग्रो होने में 3 से 6 महीने का वक़्त लगता है. एक मछली एक महीने में करीब 50 से 200 अंडे दे सकती है. एक मछली करीब 4 से 5 साल जिंदा रह सकती है. फिलहाल दिल्ली के कुछ तालाबों और पार्कों में वाटर बॉडीज बनाकर इन मछलियों को उनमें छोड़ा जाएगा.

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली के 12 जोन्स में 50 से ज्यादा जगहों पर इन मछलियों को छोड़ा जाएगा. फिलहाल दिल्ली के जाकिर हुसैन कॉलेज और सिविल लाइंस के एक तालाब में इन मछलियों को छोड़ा गया है. साफ है कि फॉगिंग को छोड़ अब स्वास्थ्य विभाग दूसरे विकल्पों की भी खोज में लगा है, जिससे इन जानलेवा बीमारियों के बढ़ते आंकड़ों को रोका जाए.

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